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बहुत ना इंसाफ़ी है रे ! अल-नूर जो कि छात्रों की अपनी मैगजीन है में निम्नलिखित गलतियां हैं। 1.इसमें पुराने फोटो छापे गए हैं। 2.छठी कक्षा मैगजीन नहीं बांटी गईं जबकि छठी कक्षा की रचनाएँ छापी गईं हैं । भई! कौन सा कानून है कि रचना तो जाएगी लेकिन मैगजीन नहीं मिलेगी। 3.माँ के पीछे संपादक साहब इस तरह पड़ गए हैं कि माँ शीर्षक से नौ रचनाएँ छपी हैं , जिनमें तीन एक ही हैं जो अलग- अलग नाम से हैं वो मैगजीन ...आगे पढ़ें... 

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